रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (दान/Charity)

देनहार कोई और है भेजत सो दिन रात लोग भरम हम पै धरै याते नीचे नैन । देने वाला तो कोई और प्रभु है जो दिन रात हमें देने के लिये भेजता रहता है लेकिन लोगों को भ्रम है कि रहीम देता है।इसलिये रहीम आॅखें नीचे कर लोगों को देता है । इश्वर के दान […]

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रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (मित्रता/Friendship)

मथत मथत माखन रहै दही मही बिलगाय रहिमन सोई मीत है भीर परे ठहराय । दही को बार बार मथने से दही और मक्खन अलग हो जाते हैं। रहीम कहते हैं कि सच्चा मित्र दुख आने पर तुरंत सहायता के लिये पहुॅच जाते हैं। मित्रता की पहचान दुख में हीं होता है। जो रहीम दीपक […]

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रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (मदद/Help)

सवे रहीम नर धन्य हैं पर उपकारी अंग बाॅटन बारे को लगे ज्यों मेंहदी को रंग । वह मनुश्य धन्य है जिसका शरीर परोपकार में लगा है जैसे मेंहदी पीसने बाले को हाथ में लग कर उसे सुन्दर बना देती है। संतत संपति जानि कै सबको सब कुछ देत दीनबंधु बिन दीन की को रहीम […]

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रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (प्रेम/Love)

रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाये टूटे से फिर ना जुटे जुटे गाॅठ परि जाये । प्रेम के संबंध को सावधानी से निबाहना पड़ता है । थोड़ी सी चूक से यह संबंध टूट जाता है । टूटने से यह फिर नहीं जुड़ता है और जुड़ने पर भी एक कसक रह जाती है। ंजे सुलगे […]

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रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (समय/Time)

धन दारा अरू सुतन सों लग्यों है नित चित्त नहि रहीम कोउ लरवयो गाढे दिन को मित्त । अपने धन यौवन और संतान में हीं नित्य अपने मन को नही लगा कर रखें। जरूरत पड़ने पर इनमें से कोइ नही दिखाई देगा । केवल इश्वर पर मन लगाओ । संकट के समय वही काम देगा […]

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रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (बड़प्पन/Greatness)

बडे़ बड़ाई ना करे बड़े न बोले बोल रहिमन हीरा कब कहै लाख टका है मोल। बड़े लोग अपनी बड़ाई स्वयं कभी नहीं करते। वे बढ चढ कर कभी नही बोलते हैं। हीरा स्वयं कभी अपने मुॅह से नही कहता कि उसका मूल्य लाख रूपया है । कहु रहीम केतिक रही केतिक गई विहाय माया […]

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रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (संगति/Company)

जेा रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग चंदन विश ब्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग । अच्छे चरित्र के स्वभाव बालों पर बुरे लोगो के साथ का कोई असर नहीं होता। चंदन के बृक्ष पर साॅप लिपटा रहने से विश का कोई प्रभाव नही होता है । यद्पि अवनि अनेक हैैं कूपवंत सरताल रहिमन मान […]

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रहीम के दोहे | Rahim ke Dohe (भक्ति/Devotion)

जे गरीब सों हित करै धनि रहीम वे लोग कहा सुदामा बापुरो कृश्राा मिताई जोग । रहीम कहते हैं कि जो लोग निर्धन और असहाय की सहायता करते हैं वे धन्य हैं । निर्धन सुदामा से मित्रता कर कृश्ण ने उसकी निर्धनता दूर की ।इसी से वे दीनबंधु कहलाये । गहि सरनागत राम की भवसागर […]

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personal experience

कबीर के दोहे | Kabir ke Dohe (अनुभव/experience)

कागत लिखै सो कागदी, को व्यहाारि जीव आतम द्रिष्टि कहां लिखै , जित देखो तित पीव। कागज में लिखा शास्त्रों की बात महज दस्तावेज है। वह जीव का व्यवहारिक अनुभव नही है। आत्म दृष्टि से प्राप्त व्यक्तिगत अनुभव कहीं लिखा नहीं रहता है। हम तो जहाॅ भी देखते है अपने प्यारे परमात्मा को ही पाते […]

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कबीर के दोहे | Kabir ke Dohe (काल/Death)

कबीर गाफील क्यों फिरय, क्या सोता घनघोर तेरे सिराने जाम खड़ा, ज्यों अंधियारे चोर। कबीर कहते है की ऐ मनुष्य तुम भ्रम में क्यों भटक रहे हो? तुम गहरी नीन्द में क्यों सो रहे हो? तुम्हारे सिरहाने में मौत खड़ा है जैसे अंधेरे में चोर छिपकर रहता है। Kabir gafil kyon firay,kya sota ghanghor Tere […]

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