गुरू नानक के दोहे | Guru Nanak ke Dohe(श्रवण /Hearing )

हुकमैं अंदरि सभु को
बाहरि हुकम न कोइ।
नानक हुकमै जे बुझै
त हउमै कहै न कोइ।
संसार का प्रत्येक प्राणी उसकी आज्ञा में बंधा है।
जो मनुश्य उसके आदेश का अर्थ समझ जाता है वह सांसारिक अहंकार से बच जाता है।
तब वह सभी बातों को प्रभु का आदेश मानकर खुशी से पालन करता है।
गावै को ताणु होवै किसै ताणु।
गावै को दाति जाणै निसाणु।
संसार के समस्त प्राणी अपने सामथ्र्य के मुताबिक उस परमात्मा का गुण गाते हैं।
जिसमें जितनी शक्ति उत्साह है वह अपने अंतरात्मा में उसकी उपस्थिति का उतना अधिक अनुभव करता है।
गावै को गुण वडिआईआ चार।
गावै को विदिआ विखमु वीचारू।
कोई उसके बड़प्पन कोई क्रियाकलापों कोई लक्षणों का गायन करता है।
कोई अपनी बुद्धि या ज्ञान के आधार पर प्रभु के नियमों तरीकों का बर्णन करता है।
गावै को साजि करे तनु खेह।
गावै की जीअ लै फिरि देह।
अदमी कभी परमात्मा को यह मान कर बर्णन करता है कि वह
प्रथमतः शरीर को निर्मित कर उसे अन्ततः खाक में मिला देता है।
दूसरे लोग इसके उलट यह मानकर प्रशंसा करता है कि वह प्राण लेकर पुनः जीवन देता है।