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कबीर के दोहे | Kabir ke Dohe (Saints/संतजन)

कहे कबीर हम ब्याहि चले हैं, पुरुख एक अबिनासी।
कबीर एक अमर अविनासी पुरुष को अपना पति मानते हैं।
यहॉं कबीर का ईश्वर के साथ दाम्पत्य प्रेम दिखाया हैं।
Kabir says he has been married to the immortal.
भग भोगे भग उपजे,भग से बचे ना कोइ
कहे कबीर भग ते बचे भक्त कहाबै सोऐ।
भग भोग उत्पन्न करता है। इससे वचना अति कठिन है।
जो व्यक्ति इससे अपनी रक्षा करता है वस्तुतः वही भक्त हैं
भग का अर्थ कामना,इच्छा, भोग से हैं।
Bhag bhoge bhag upjay, bhag te bachai na koy
Kahai kabir bhag te bachai,bhakt kahabai soy.
Indulgement in lust creates more lust. None can escape from it.
Kabir says one who can save himself from it is a saint.
आशा तजि माया तजी मोह तजी और मन
हरख,शोक निंदा तजइ कहै कबीर संत जान।
जो व्यक्ति आशा, माया और मोह को त्याग देता है
तथा जिसने सुख, शोक निन्दा का परित्याग करदिया है
कबीर के कथाअनुसार वही सत्य पर है।
Aasha taji maya tajai moh tajai aru man
Harash shok ninda tajai kahai Kabir sant jaan.
One who sacrifices hope illusion attachment and pride
One who gives up pleasure sorrow condemnation,Kabir says is the real saint.
साधु आबत देखि के चरन लागो धाऐ
क्या जानो इस वेश मे हरि आऐ मिली जाऐ।
संत व्यक्ति को आते देखकर दौड़ के उनके चरणों का स्पर्श करें।
क्या मालूम कि एसी में प्रभु स्वयं आपसे मिलने आये हों।
Sadhu aabat dekhi ke charan lago dhaye
Kya jano is vesh meHari aay mili jaye
Seeing the saint coming, run at his feet
Who knows in this garb, God himself comes to meet.
साधु भूखा भाव का धन का भूखा नाहि
धन का भूखा जो फिरऐ सो तो साधू नाहि।
साधु भाव का भूखा होता है, धन का भूखा नहीं होता
जो धन की चिंता में धूमता है वह साधु नहीं है।
Sadhu bhukha bhaw ka dhan ka bhukha nahi
Dhan ka bhukha jo firay so to sadhu nahi.
A saint is hungry of feeling not of riches
One who roams to satisfy riches he is not a saint
साधु सेवा जा घर नहीं सतगूरु पुजा नाहि
सो घर मरघट जानीऐ भूत बसाइ तेही माहि।
जिस घर में लोग सांत की सेवा और सतगुरु की पूजा नहीं करते
उस घर को श्मसान समझना चाहिये और वहॉं भुत प्रेत वास कहता हैं।
Sadhu seva ja ghar nahi Satguru puja nahi
So ghar marghat janiye bhut basai tehi mahi
Where there is no service to saint and no worship to God
Know that house as crematorium where ghost lives.
जिनके पांचो बश नहीं तिनते साहिब दूर।
साधु सोइ सराहिये पांचो राखिये चूर।
जिस संत ने अपने पॉंच विषय इच्छाओं का शमन करलिया है-वह प्रशंसनीय है।
जिसने अपने पॉंचो इच्छाओं का दमन नहीं किया-प्रभु उनके बहुत दूर है।
Jinke pancho bash nahi tinte sahib door
Sadhu soi sarahiye pancho rakhaiye choor
Praise the saint who has destroyed all his five sensual desires
One who has not controlled his desires God is far from him.
साधु सोए साराहिऐ,कनक कामिनी त्याग
और कछु इक्छा नहीं, निश दिन रहे अनुराग।
जिस साधु ने धन एंव स्त्री सुख का परित्याग कर दिया वह प्रशंनीय हैं।
उन्हें अन्य कोई इच्छा नहीं रहती तथा वे सर्वदा ईश्वर की भक्ति में मगन रहते हैं।
Sadhu soi sarahiye, kanak kamini tyag
Aur kachu iksha nahi , nish din rahe anurag.

Praise the saint who has sacrificed riches and women
He has no other desire he is always engrossed in God.
हरि सेती हरिजन बरै जाने सन्त सूजान
सेतु बांधि रघुबर चले किद गऐ हनूमान।

एक भक्ति प्रमात्मा से महान है। राम भगवान ने पुल बनाकर समुद्र पार किया
पर हनुमान ने एक छलांग में उसे पार कर लिया।
Hari seti harijan bare jane sant sujan
Setu bandhi Raghubar chale kudi gaye Hanuman
A devotee is greater than God. This is known to the real saint.
Ram crossed the sea after constructing bridge but Hanuman jumped the sea in one go.
हरि सो तु मति हेत करु कर हरिजान सो हेत
माल मुलक हरि देत है हरिजन हरि ही देत।
हमें ईश्वर से नहीं अपितु ईश्वर के भक्तों से प्रेम करना चाहिये।
ईश्वर हमें नशवान धन-संपत्ति देता है पर भक्त हमें ईश्वर हीं समर्पित कर देता है।
Hari so tu mati het karu kar harijan so het
Mal mulk Hari det hai, Harijan Hari hi det.
You do not love God,you love saint and seer
God gives perishable land and property but saint gives God himself.
सो दिन गया अकाज में संगत भइ ना संत
प्रेम बिना पशु जीवना भाव बिना भटकन्त।
वह दिन वरूर्थ गया जिस दिन संत से मिलय नहीं हो पाया।
प्रेम बिना यह जीवन प्शु समान है जो किसी भाव के भटक रहा है।
So din gaya akaj mai sangat bhai na sant
Prem bina pashu jiwana, bhaw bina bhatkant
The day is worthless if there is no meeting or communion with saint
The life without feeling for God is like a roaming animal without love.
साधु मिलेय साहिब मिलये अंतर रही ना रेख
मनसा वाचा करमना साधु साहिब ऐक
साधु और परमरत्मर का मिलन एक ही है। इन दोनो में तनिक भी अन्तर नहीं है
मनसा,वचा और कर्मणा संत एंव परमात्मर एक है।
Sadhu milai sahib milay anter rahi na rekh
Mansa wacha karmana sadhu sahib ek.
Got a saint, you got God. There is no difference at all.
In feeling, speaking and duty, saint and God are one
साधु बड़े संसार में हरि ते अधिका सोये
बिन इच्छा पूरन करे साधु हरि नहीं दोये।
संसार में साधु का स्थान बड़ा है। वह परमात्मा से भी अधिक हैं।
बिना इच्छा किये संत सभी चीजें पूर्ण करते हैं। साधु एंव परमात्मा में कोई अन्तर नहीं है।
Sadhu bare sansar mein,Hari te adhika soye
Bin ichha puran kare, sadhu Hari nahi doye.
A saint is greater than God in this world. He fulfills everything without desire
Saint and God are not different.
साधु नदी जल प्रेम रस ताह परच्छा लइ अंग
कहे कबीर निरमल भया हरि भक्तन के संग।
साधु प्रेम रस जल के नदी समान हैं। हमें उससे अपने मन एंव शरीर धोना चाहिऐ।
प्रभु के भकतों के संग कबीर कर निर्मल एंव पवित्र हो जाता है।
Sadhu nadi jal prem ras,taha prachhaloe ang
Kahe kabir nirmal bhaya, Hari bhaktan ke sang.
A saint is like a river flowing with water of love and devotion
One who washes his mind and body in the company of devotee of God, Kabir says he becomes pure.
सरवर तरुबर संतजन चौथा बरसे मेह
परमारथ के कारने चारो धरि देह।
एक सरोवर वृक्ष संत व्यक्ति तथा चौथा वर्षा वाले वादल
परर्माथ हेत हीं जन्म लेकर शरीर धारन करते हैं।
Sarwar tarubar santjan,choutha barse meh
parmarath ke karne, charoe dhari deh.
A river tree saints and the fourth a raining cloud
All the four have taken birth for charity and benevolence.