कबीर के दोहे | Kabir ke Dohe (Omnipotent God/सर्वव्यापक ईश्वर)

मैं जानू हरि दूर है हरि हृदय भरपूर
मानुस ढुढंहै बाहिरा नियरै होकर दूर।
लोग ईश्वर को बहुत दूर मानते हैं पर परमात्मा हृदय में पूर्णतः विराजमान है।
मनुष्य उसे बाहर खोजता है परंतु वह निकट होकर भी दूर लगता है।
Mai janu Hari door hai Hari hirday bharpoor
Manush dhudhai bahira niaray hokar door .
I know the God is far away but God is fully in heart
People search Him outside , he is near but seems far .
मोमे तोमे सरब मे जहं देखु तहं राम
राम बिना छिन ऐक ही, सरै न ऐको काम।
मुझ में तुम में सभी लोगों में जहाॅं देखता हूॅं वहीं राम है।
राम के बिना एक क्षण भी प्रतीत नहीं होता है।
राम के बिना कोई कार्य सफल नहीं होता है।
Mome tome sarab me jahn dekhu tahn Ram
Ram bina chhin ek hi , sarai na eko kam .
In me you and all ,whereever I see there is Ram
Not even a second is without Ram , nothing is successful without Ram .
बाहिर भीतर राम है नैनन का अभिराम
जित देखुं तित राम है, राम बिना नहि ठाम।
प्रभु बाहर-भीतर सर्वत्र विद्यमान है। यही आॅंखें का सुख है। जहाॅं भी दृष्टि जाती है।
वही राम दिखाई देते है। राम से रिक्त कोई स्थान नहीं है। प्रभु सर्वव्यापक हैं।
Bahir bhitar Ram hai nainan ka abhiram.
Jit dekhun tit Ram hai , Ram bina nahi tham
Ram is outside and inside , Ram is the pleasure of eyes .
Where ever I see, I see Ram , no place is without Ram .
राम नाम तिहुं लोक मे सकल रहा भरपूर
जो जाने तिही निकट है, अनजाने तिही दूर।
तीनों लोक में राम नाम व्याप्त है। ईश्वर पूर्णाता में सर्वत्र वत्र्तमान हैं।
जो जानता हे-प्रभु उसके निकट हैं परंतु अनजान-अज्ञानी के लिये बहुत दूर हैं।
Ram nam tihun lok me sakal raha bharpoor
Jo jane tihi nikat hai , anjane tihi door .
The name of Ram is all-pervasive in the three worlds
One who knows is near but the ignorant is very far from this truth.
हथियार मे लोह ज्यों लोह मध्य हथियार
कहे कबीर त्यों देखिये, ब्रहम मध्य संसार।
जैसे हथियार में लोहा और लोहा में हथियार है उसी प्रकार कबीर के
अनुसार यह संसार भी ब्रहम के बीच वसा है। ब्रहम बिना संसार का कोई अस्तित्व नहीं हो सकता।
Hathiyar me loh jyo loh madhya hathiyar
Kahe Kabir tyo dekhiye ,Brahm madhya sansar .
As is the iron in weapon , weapon is in the iron
Kabir says so you see the world in the midst of God .
पुहुप मध्य ज्यों बाश है,ब्यापि रहा जग माहि
संतो महि पाइये, और कहीं कछु नाहि।
जिस प्रकार पुष्प में सुगंध है उसी तरह ईश्वर संपूर्ण जगत में व्याप्त हैं।
यह ज्ञान हमें संतों से हीं प्राप्त हो सकता है। इसके अतिरिक्त अन्यत्र कुछ भी नहीं है।
Puhup madhya jyon bash hai , byapi raha jag mahii
Santo mahi payeye , aur kahin katchu nahi .
As there is fragrance in flower it is omnipresent in world .
This can be achieved through the company of saints , there is nothing anywhere more .
कबीर खोजी राम का गया जु सिंघल द्वीप
साहिब तो घट मे बसै जो आबै परतीत।
कबीर ईश्वर को ढूढ़ने श्रीलंका द्वीपतक गये किंतु ईश्वर तो शरीर में ही विद्यमान हैं।
यदि तुम्हें विश्वास हो तो तुम उन्हें अपने हृदय में ही पा लोगे।
Kabir khoji Ram ka gaya ju Singhal dweep
Sahib to ghat mein basai jo aabai parteet .
Kabir went up to Sri Lanka island in search of God
But God resides in the body if you believe it you will find Him .
घट बिन कहूॅं ना देखिये राम रहा भरपूर
जिन जाना तिन पास है दूर कहा उन दूर।
कोई भी शरीर राम से शुन्य नहीं है। सभी शरीर में ईश्वर पूर्ण रुपेण वत्र्तमान हैं।
जो ज्ञानी है उसके पास ही ईश्वर हैं। जो उन्हें दूर मानता है- भगवान उससे बहुत दूर हैं।
Ghat bin kahun na dekhiye Ram raha bharpoor
Jin jana tin pass hai , door kahan un door .
Do not see any body without God, Ram is present in everybody
Who knows it will find him near, who says he is not there will find him far .
घट बढ़ कहूॅं ना देखिये प्रेम सकल भरपूर
जानै ही ते निकट है अनजाने तै दूर।
परमात्मा कहीं भी कम या अधिक नहीं हैं। वे सभी जगत पूर्ण परमात्मा हैं-प्रेम से
परिपूर्ण हैं। ज्ञानी के लिये वे अति निकट और अज्ञानी के लिये बहुत दूर हैं।
Ghat badh kahun na dekhiye prem sakal bharpoor
Janai hi te nikat hai anjane tai door .
Do not see God less or more anywhere , love is full everywhere .
One who knows this will find him near , ignorant will find him very far .
ज्यों बघुरा बब मध्य, मध्य बघुरा बब
त्यों ही जग मधि ब्रहम है, ब्रहम मधि जगत सुभाव।
जिस प्रकार तूफान के बीच हवा और हवा के बीच तूफान स्थित है उसी प्रकार संसार के बीच
ब्रहम और स्वभाविक रुप से ब्रहम के बीच संसार स्थित है।
Jyon baghura bab madhya , madhya baghura bab
Tyon hi jag madhi Brahm hai,Brahm madhi jagat subhav .
As there is air in the middle of storm and storm in the middle of air
So also God is in the middle of this world and naturally world is in the middle of God .
ज्यों पाथर मे आग है,त्यों घट मे करतार
जो चाहो दीदार को चकमक होके जार।
जिस प्रकार पत्थर में आग है उसी तरह प्रत्येक शरीर में प्रभु वसतें हैं।
यदि तुम परमात्मा को देखना चाहते हो तो ज्ञान के आग में मन और माया को जलाओं।
Jyon pather mein aag hai tyon ghat me Kartar
Jo chahe didar ko chakmak hoke jar .
As there is fire in the stone, there is God in the body
If you wish to see Him , burn in the fire of knowledge .
जैसे तरुबर बीज मह, बीज तरुबर माहि
कहे कबीर बिचारि के, जग ब्रहम के माहि।

जिस प्रकार वृक्ष बीज में स्थित है तथा बीज वृक्ष में उपस्थित है-उसी प्रकार यह संपूर्ण संसार ब्रहम में है।
यह कबीर का निश्चित विचार है।
Jaise tarubar beej mah ,beej tarubare mahi
Kahe Kabir bichari ke , jag Brahm ke mahi .
As there is seed in the midst of tree and tree in the midst of seed
Kabir says after thinking that this world is in the midst of God .
ज्यों नैनो मे पुतली, त्यों खालिक घट माहि
मूरख लोग ना जानही, बाहिर ढूढ़न जाहि।
आॅंखों में पुतली की भाॅंति हीं प्रत्येक शरीर में प्रभु विराजमान है। यह मुर्ख
और अज्ञानी नहीं जानते और उन्हें काशी-कावा,मंदिर-मस्जिद में खोजने जाते हैं।
Jyon naino me putli , tyon khalik ghat mahi
Murakh log na janhi , bahir dhudhan jahi .
Just like pupil is in the eyes, God is in the body
The ignorant does not know it and go in search outside .
जा कारण जग ढूढ़ीये, सो तो घटहि माहि
परदा दिया भरम का तातै सूझय नाहि।
प्रभु को हम पूरे जग में खोजते फिरते हैं परंतु वह तो हमारे शरीर में हीं बसता है।
अविश्वास और भ्रम का परदा हमें प्रभु को देखने नहीं देता है।

Ja karan jag dhudhiya , so to ghatahi mahi
Parda diya bharam ka tatai sujhai nahi .
The God whom we search in the world is present in this body itself
The curtain of doubt within us does not let us see Him .
उहवन तो सब ऐक है, परदा रहिया वेश
भरम करम सब दूर कर, सब ही माहि अलेख।
परमात्मा के यहाॅं सब एक समान है। लेकिन यह शरीर और वेष परदा की तरह काम करता है।
हमें अपने समस्त भ्रम को दूर करना चाहिये तब हमें ईश्वर की उपस्थिति की अनुभूति हो सकती है।
Uahwan to sab ek hai , parda rahiya wesh
Bharm karam sab door kar , sab hi mahi alekh .
They all are one ,this body and the dress are its curtain
Clear your all doubts and you will feel the presence of God