कबीर के दोहे | Kabir ke Dohe (काल/Death)

कबीर गाफील क्यों फिरय, क्या सोता घनघोर
तेरे सिराने जाम खड़ा, ज्यों अंधियारे चोर।
कबीर कहते है की ऐ मनुष्य तुम भ्रम में क्यों भटक रहे हो?
तुम गहरी नीन्द में क्यों सो रहे हो? तुम्हारे सिरहाने में मौत खड़ा है जैसे
अंधेरे में चोर छिपकर रहता है।
Kabir gafil kyon firay,kya sota ghanghor
Tere sirane jam khara,jyon andhiyare chore.
Kabir why do you roam in doubt, why are you in deep slumber
The God of death is standing near your headrest as a thief in the darkness.
कबीर जीवन कुछ नहीं, खिन खारा खिन मीठ
कलहि अलहजा मारिया, आज मसाना ठीठ।
कबीर कहते है की यह जीवन कुछ नहीं है।
इस क्षण मे खारा और तुरत जीवन मीठा हो जाता है।
जो योद्धा वीर कल मार रहा था आज वह स्वयं श्मसान में मरा पड़ा है।
Kabir jeevan kuchh nahi, khin khara khin meeth
Kalhi alhaja mariya,aaj masana theeth
Kabir says this life is nothing. One moment it is salty and in another sweet
The brave warrior who was slaying yesterday is today dead in burning ground.
कबीर टुक टुक देखता, पल पल गयी बिहाये
जीव जनजालय परि रहा, दिया दमामा आये।
कबीर टुकुर टुकुर धूर कर देख रहे है। यह जीवन क्षण क्षण बीतता जा रहा है।
प्राणी माया के जंजाल में पड़ा हुआ है और काल ने कूच करने के लिये नगारा पीट दिया है।
Kabir tuk tuk dekhta, pal pal gayi bihay
Jeev janjalay pari raha, diya damama aaye.
Kabir stares in nothingness as life lessens every moment
The living is fallen in perplexity
while the death has started beating its drum to move.
कबीर पगरा दूर है, आये पहुचै सांझ
जन जन को मन राखती, वेश्या रहि गयी बांझ।
कबीर कहते है की मुक्ति बहुत दूर है और जीवन की संध्या आ चुकी है।
वह प्रत्येक आदमी का मन पूरा कर देती है पर वेश्या स्वयं बांझ ही रह जाती है।
Kabir pagra door hai,aaye pahunchi sanjh
Jan jan ko man rakhti vesya rahi gayee banjh.
Kabir says liberation is very far,the evening has come
She fulfills the desire of everyone but like a prostitute remains sterile.
कबीर हरि सो हेत कर, कोरै चित ना लाये
बंधियो बारि खटीक के, ता पशु केतिक आये।
कबीर कहते है की प्रभु से प्रेम करो। अपने चित्त में कूड़ा कचरा मत भरों।
एक पशु कसाई के द्वार पर बांध दिया गया है-समझो उसकी आयु कितनी शेष बची है।
Kabir Hari so het kar,korai chit na laye
Bandhyo bari khatik ke,ta pashu ketik aaye.
Kabir says love the Almighty, do not allow rubbish in your head
The animal is tied at the gate of butcher, how much of its age is left.
कबीर सब सुख राम है, और ही दुख की राशि
सुा, नर, मुनि, जन,असुर, सुर, परे काल की फांसि।
केवल प्रभु समस्त सुख देने वाले है। अन्य सभी दुखों के भंडार है।
देवता, आदमी, साधु, राक्षस सभी मृत्यु के फांस में पड़े है।
मृत्यु किसी को नहीं छोड़ता।राम ही सुखों के दाता है।
Kabir sab sukh Ram hai,aaur hi dukh ki rashi
Sur,nar,muni,jan,asur,sur,pare kal ki fansi.
Kabir says Ram is the only happiness, others are all store of pain
The demi-gods, men, hermits, demons, all are in the trap of death.
कागा काय छिपाय के, कियो हंस का भेश
चलो हंस घर आपने, लेहु धनी का देश।
कौये ने अपने शरीर को छिपा कर हंस का वेश धारण कर लिया है।
ऐ हंसो-अपने घर चलो। परमात्मा के स्थान का शरण लो। वही तुम्हारा मोक्ष होगा।
Kaga kay chhipay ke,kiyo hans ka bhesh
Chalo hans ghar aapne,lehu dhani ka desh.
The crow has concealed his body, has kept the dress of swan
Go to your own house swan, adopt the place of the Almighty.
काल जीव को ग्रासै, बहुत कहयो समुझाये
कहै कबीर मैं क्या करुॅ, कोयी नहीं पतियाये।
मृत्यु जीव को ग्रस लेता है-खा जाता है। यह बात मैंने बहुत समझाकर कही है।
कबीर कहते है की अब मैं क्या करु-कोई भी मेरी बात पर विश्वास नहीं करता है।
Kal jeev ko grasai, bahut kahyo samujhaye
Kahain Kabir main kya karun,koyee nahi patiyaye.
Death devours the living, have told this many a times
Kabir says what can I do if no body believes me.
काल छिछाना है खड़ा, जग पियारे मीत
राम सनेही बाहिरा, क्यांे सोबय निहचिंत।
मृत्यु रुपी बाज तुम पर झपटने के लिये खड़ा है। प्यारे मित्रों जागों।
परम प्रिय स्नेही भगवान बाहर है। तुम क्यों निश्चिंत सोये हो। भगवान की भक्ति बिना तुम निश्चिंत मत सोओ।
Kal chichana hai khara,jag piyare meet
Ram sanehi bahire,kyo sobay nihchint.
The death hawk is standing, my dear friend awake
Affectionate Ram is standing, why then are you sleeping carelessly.
काल हमारे संग है, कश जीवन की आस
दस दिन नाम संभार ले,जब लगि पिंजर सांश।
मृत्यु सदा हमारे साथ है। इस जीवन की कोई आशा नहीं है।
केवल दस दिन प्रभु का नाम सुमिरन करलो जब तक इस शरीर में सांस बचा है।
Kaal hamare sang hai,kas jeevan ki aas
Das din nam sambhar le,jab lagi pinjar sansh.
The death is always with us, there is no hope of this life
Remember the name of God for ten days till there breath is in the body.
काल काल सब कोई कहै, काल ना चिन्है कोयी
जेती मन की कल्पना, काल कहाबै सोयी।
मृत्यु मृत्यु सब कोई कहते है पर इस मृत्यु को कोई नहीं पहचानता है।
जिसके मन में मृत्यु के बारे में जैसी कल्पना है-वही मृत्यु कहलाता है।
Kal kal sab koi kahe, kal na chinhai koyee
Jeti man ki kalpana, kal kahabai soyee.
Everybody repeats the fact of death, no one knows what is death
As is the imagination of ones mind, so does he think of the death.
कुशल कुशल जो पूछता, जग मे रहा ना कोये
जरा मुअई ना भय मुआ, कुशल कहाॅ ते होये।
हमेषा एक दूसरे से कुशल-कुशल पूछते हो। जब संसार में कोई नहीं रहा तो कैसा कुशल।
बुढ़ापा नहीं मरा,न भय मरा तो कुशल कहाॅ से कैसे होगा।
Kushal kushal jo puchhta,jag me raha na koye
Jara muai na bhay mua,kushal kahan te hoye.
You repeatedly ask others their well being when no body remains in the world
Ageing has not died, fear is not dead, how can then there be any wellbeing.
कुशल जो पूछो असल की, आशा लागी होये
नाम बिहुना जग मुआ, कुशल कहाॅ ते होये।
यदि तुम वास्तव में कुशल पूछते हो तो जब तक संसार में आशक्ति है प्रभु के नाम सुमिरण
और भक्ति के बिना कुशल कैसे संभव है।
Kushal jo puchho asal ki,aasha lagi hoye
Nam bihuna jag mua,kushal kahan te hoye.
If you really ask for wellbeing, hope and attachment is always binding
The world is dying without the name of God, how then is wellbeing possible.
काल पाये जग उपजो, काल पाये सब जाये
काल पाये सब बिनसि है, काल काल कंह खाये।
अपने समय पर सृष्टि उत्पन्न होती है। अपने समय पर सब का अंत हो जाता है।
समय पर सभी जीचों का विनाश हो जाता है। काल भी काल को-मृत्यु भी समय को खा जाता है।
Kal paye jag upjo,kal paye sab jaye
Kal paye sab binasi hain,kal kal kahn khaye.
The world is created at its own time,every thing goes at its time
Everything is destroyed at the proper time,the time is also eaten by death.
काल फिरै सिर उपरै, हाथौं धरी कमान
कहै कबीर गहु नाम को, छोर सकल अभिमान।
मृत्यु हाथों में तीर धनुष लेकर सबों के सिर पर चक्कर लगा रही है।
समस्त घमंड अभिमान छोड़ कर प्रभु के नाम को पकड़ो-ग्रहण करो-तुम्हारी मुक्ति होगी।
Kaal firay sir uprai, hathon dhari kaman
Kahain Kabir gahu nam ko,chhor sakal abhimaan.
The death is encircling over the head,with bow and arrow in the hand
Kabir says grab the name of God,keeping off all the pride.
जाता है सो जान दे, तेरी दासी ना जाये
दरिया केरे नाव ज्यों, घना मिलेंगे आये।
ज जा राहा है उसे जाने दो-तेरा क्या जा राहा है? जैसे नदी में नाव जा रही है तो
फिर बहुत से लोग तुम्हें मिल जायेंगे। आवा गमन-मृत्यु जन्म की चिंता नहीं करनी है।
Jaata hai so jaan de, teri dasi na jaye
Dariya kere naw jyon,ghana milange aaye.
One who goes, let him go, what is your concern
As the boat in the river, many more will come to you.
चहुॅ दिस ठाढ़े सूरमा, हाथ लिये हथियार
सब ही येह तन देखता, काल ले गया मार।
चारों दिशाओं में वीर हाथों में हथियार लेकर खड़े थे।
सब लोग अपने शरीर पर गर्व कर रहे थे परंतु मृत्यु एक ही
चोट में शरीर को मार कर ले गये।
Chahun this thadhe soorma,hath liye hathiyar
Sab hi yeh tan dekhta,kal le gaya mar.
The brave are standing on all the four sides, weapons in their hands
Everybody is seeing his body,that the death has taken away with a blow.
चलती चाकी देखि के, दिया कबीरा रोये
दो पाटन बिच आये के, साबुत गया ना कोये।
चलती चक्की को देखकर कबीर रोने लगे। चक्की के दो पथ्थरों के बीच कोई भी पिसने से नहीं
बच पाया। संसार के जन्म मरण रुपी दो चक्को के बीच कोई भी जीवित नहीं रह सकता है।
Chalti chakki dekhi ke, diya Kabira roye
Do patan bitch aaye ke,sabut gaya na koye.
On seeing the moving grinding mill, Kabir started weeping
In between the two mill stone, none can remain complete.
गुरु जहाज हम पाबना,गुरु मुख पारि पराय
गुरु जहाज जाने बिना, रोबै घट खराय।
कबीर कहते है की मैंने गुरु रुपी जहाज को प्राप्त कर लिया है। जिसे यह जहाज मिल गया है वह
निश्चय इस भव सागर को पार कर जायेगा। जिसे यह गुरु रुपी जहाज नहीं मिला वह किनारे खड़ा रोता रहेगा।
गुरु के बिना मोक्ष संभव नहीं है।
Guru jahaaj ham pabna,Guru mukh pari parai
Guru jahaaj jane bina,robai ghat kharai.
I have got the ship of Guru, whosoever gets one will cross over the worldly sea
One who doesn’t have the ship of Guru will weep standing on the bank.
घड़ी जो बाजै राज दर, सुनता हैं सब कोये
आयु घटये जोवन खिसै, कुशल कहाॅ ते होये।
राज दरवार में घड़ी का घंटा बज रहा है। सभी लोग उसे सुन रहे है।
लोगो की आयु कम हो रही है। यौवन भी खिसक रहा है-तब जीवन का कल्याण कैसे होगा।
Ghari jo bajae raaj dar, sunta hain sab koye
Aayu ghataye jowan khisai,kushal kahan te hoye.
When the watch strikes in the king’s court, everybody hears it
The age is decreasing, youth is slipping, how can there be well being.
चाकी चली गुपाल की, सब जग पीसा झार
रुरा सब्द कबीर का, डारा पात उखार।
परमात्मा के चलती चक्की में संसार के सभी लोग पिस रहे है। लेकिन कबीर का प्रवचन
बहुत ताकतवर है। जो भ्रम और माया के पाट पर्दा को ही उघार देता है और मोह
माया से लोगो की रक्षा हो जाती है।
Chaki chali Gupal ki,sab jag peesa jhaar
Rura sabd Kabir ka, daara paat ukhaar.
Everyone in the world is being grinded completely in the grinding mill of God.
The discourse of Kabir is very unpleasing but it removes the curtain of illusions.
झूठा सुख को सुख कहै, मानत है मन मोद
जगत चबेना काल का, कछु मुथी कछु गोद।
झूठे सुख को लोग सुख कहते है और मन ही मन प्रसन्न होते है।
यह संसार मृत्यु का चवेना है। मृत्यु कुछ को अपनी मुठ्ठी और कुछ को गोद में रख कर
लगातार चवा रहा है।
Jhootha sukh ko sukh kaahai,manat hai man mod
Jagat chabena kaal ka, katchhu muthi katchhu god.
False pleasure is mistaken for happiness when its only mindly comfort
The world is being chewed with death, keeping some in palm and some in lap.
तरुवर पात सों यों कहै, सुनो पात एक बात
या घर याही रीति है, एक आवत एक जात।
बृक्ष पत्तों से कहता है की ऐ पत्तों मेरी एक बात सुनों।
इस धर का यही तरीका है की एक आता है और एक जाता है।
Taruvar paat so yon kahai,suno paat ek baat
Ya ghar yahi reeti hai,ek aavat ek jaat.
The tree is saying this to leaves, o hear you this one thing
This is the custom in this house, one comes in and the other leaves.
धरती करते एक पग, करते समुद्रा फाल
हाथांे पर्वत तौलते, ते भी खाये काल।
बामन ने एक कदम में जगत को माप लिया। हनुमान ने एक छलांग में समुद्र को पार कर लिया।
कृष्ण ने एक हाथ पर पहाड़ को तौल लिया लेकिन मृत्यु उन सबोंको भी खा गया।
Dharti karte ek pag,karte samudra fal
Hantho parvat kaulte,tevi khaye kaal.
Measured the earth in one step,crossed the sea in one leap
Weighed the mountain from one hand, even such of them were eaten by death.
निश्चल काल गरासही, बहुत कहा समुझाय
कहे कबीर मैं का कहुॅ, देखत ना पतियाय।
मृत्यु निश्चय ही सबको निगलेगा-कबीर ने इस तथ्य को बहुत समझाकर कहाॅ।
वे कहते कहते है की मैं क्या करुॅ-लोग आॅंख से देखने पर भी विश्वास नहीं करते है।
Nishchay kaal garasahi, bahut kaha samujhay
Kahe Kabir main ka kahun, dekhat na patiyay.
The death will certainly devour, have said this ever again
Kabir says what should I say when others do not believe this even after seeing.
माली आवत देखि के, कलियाॅं करे पुकार
फूले फूले चुनि लियो, कल्ह हमारी बार।
माली को आता देख कर फूल पूकारने लगी। सभी फूलों का तुम आज चुन लो-मेरी भी बारी कल्ह आऐगी।
एक दिन सबकी एक ही दसा होगी।
Mali aawat dekhi ke,kaliyan kare pukar
Fhoole Fhoole chuni liyo,kalh hamari bar.
Seeing the gardener coming, the flowers started calling
Start picking up the flowers, your chance will come tomorrow.
बेटा जाय क्या हुआ, कहा बजाबै थाल
आवन जावन हवै रहा, ज्यों किरी का नाल।
पुत्र के जन्म से क्या हुआ? थाली पीट कर खुशी क्यों मना रहे हो?
इस जगत में आना जाना लगा ही रहता है जैसे की एक नाली का कीड़ा
पंक्ति बद्ध हो कर आजा जाता रहता है।
Beta jaye kya hua, kaha bajabai thaal
Aavan jaavan hawai raha, jyon kiri ka naal.
Why do you beat plate and rejoice ? What happened if the son was born.
Coming and going continues forever, as the line of worm comes and goes into the drain.