कबीर के दोहे | Kabir ke Dohe (Chain/बन्धन)

आंखो देखा घी भला, ना मुख मेला तेल
साधु सोन झगरा भला, ना साकुत सोन मेल।
धी देखने मात्र से ही अच्छा लगता है पर तेल मुॅुह में डालने पर भी अच्छा नहीं लगता है।
संतो से झगड़ा भी अच्छा है पर दुष्टों से मेल-मिलाप मित्रता भी अच्छा नहीं है।
Aakhon dekha ghee bhala,na mukh mela tel
Sadhu son jhagra bhala,na sakut son mel.
Ghee looks good even to see but oil is not good even to taste
Even a quarrel with the saint is good but any relation with the wicked is not good.
उॅचै कुल के कारने, बंस बांध्यो हंकार
राम भजन हृदय नाहि, जायों सब परिवार।
उच्च कुल-वंश के कारण बाॅंस घमंड से बंधा हुआ अकड़ में रहते है। जिसके ह्रदय में राम की भक्ति नहीं है
उसका संपूर्ण परिवार नष्ट हो जाता है। बाॅंस के रगड़ से आग पैदा होने के कारण सारे बाॅंस जल जाते हंै।
Unchai kul ke karne,bansh bandhyo hankar
Ram bhajan hirday nahi,jayo sab pariwar.
The bamboo is bound with vanity being of a high caste,
All family perishes, if there is no devotion to Ram.
उजर घर मे बैठि के, कैसा लिजय नाम
सकुट के संग बैठि के, किउ कर पाबेराम।
सुनसान उजार घर में बैठकर किसका नाम पुकारेंगे।
इसी तरह मुर्ख-अज्ञानी के साथ बैठकर ईश्वर को कैसे प्राप्त कर सकंेगे।
Ujar ghar me baithi ke kiska lijay nam
Sakut ke sang baithi ke,kiuo kar pabe Ram.
Sitting in a deserted house, whom does one call
Sitting with an idiot, how does one get Ram.
एक अनुपम हम किया, साकट सो व्यवहार
निन्दा सती उजागरो, कियो सौदा सार।
मैने एक अज्ञानी से लेनदेन का व्यवहार कर के अच्छा सौदा किया।
उसके द्वारा मेरे दोषों को उजागर करने से मैं पवित्र हो गया। यह व्यापार मेरे लिये बहुत लाभदायी रहा।
Ek anupam hum kiya,sakat so byabhar
Ninda sati ujagaro,kiyo sauda sar.
An excellent job I did by transacting with the fool
With strictures from him, I became clean. It was a good bargain.
कंचन मेरु अरपहि, अरपै कनक भंडार
कहै कबीर गुरु बेमुखी, कबहु ना पाबै पार।
भले आप स्वर्ण भंडार या सोने का पहाड़ दान में दे दें, लुटा दें पर यदि आप गुरु के उपदेसों के प्रति उदासीन हैं तो
आप संसार सागर को पार नहीं कर पायेंगे।
Kanchan meru arpahi,arpai kanak bhandar
Kahai Kabir guru bemukhi,kabahu na pabai par.
Even if you donate a hill of gold or a treasure of gold
Kabir says, if you are indifferent to your Guru, you willnever cross this worldly sea.
कबीर साकट की सभा तु मति बैठे जाये
ऐक गुबारै कदि बरै, रोज गाधरा गाये।
कबीर मूर्खों की सभा में बैठने के लिये मना करते है। यदि एक गोशाला में नील गाय, गद्हा और गाय
एक साथ रहेंगे तो उन में परस्पर अवस्य लड़ाई झगड़ा होगा। दुष्ट की संगति अच्छी नहीं है।
Kabir sakat ki sabha tu mati baithe jaye
Ek gubarai kadi barai,roj gadhara gaye
Kabir says you don’t ever sit in the assembly of idiots
If there are antelopes,ass and cow in the shed,they will certainly quarrel among themselves.
खशम कहाबै वैषनव, घर मे साकट जोये
एक घड़ा मे दो मता, भक्ति कहां ते होये।
पति ईष्वर का भक्त वैष्वनव और पत्नी बेबकूफ मूर्ख हो तो एक ही घर में दो मतों विचारों के कारण
भक्ति कैसे संभव हो सकती है।
Khasam kahabai vaishnav,ghae me sakat joye
Ek ghara me do mata,bhakti kahan te hoye.
The husband is the devotee of God, wife is an idiot
If there are two views in the house, how will the devotion arise.
कबीर गुरु की भगति बिनु, राजा रसम होये
माटिृ लड़ै कुमहार की,घास ना डारै कोये।
कबीर कहते है की गुरु की भक्ति बिना एक राजा गद्हा के समान है।
उसके उपर कुम्हार की मिटृी लादी जाती है और उसे कोई घास भी नहीं देता है।
गुरु ज्ञान के बिना राजा भी महत्वहीन है।
Kabir Guru ki bhagati binu,raja rasam hoye
Mati ladai kumhar ki,ghas na darai koye.
Kabir says without the devotion of Guru,the king becomes ass
Clay is loaded on a potter and no one provides him grass.
कबीर चंदन के भिरे, नीम भी चंदन होये
बुरो बंश बराईया, यों जानि बुरु कोये।
कबीर कहते है की च्ंादन के संसर्ग में नीम भी चंदन हो जाता है पर बाॅंस अपनी अकड़ घमंड के कारण कभी चंदन नहीं होता है।
हमें धन विद्या आदि के अहंकार में कभी नहीं पड़ना चाहिये।
Kabir chandan ke bhire,neem bhi chandan hoye
Buro bansh baraiya,youn jani burou koye.
In the company of a Sandal tree, the Neem too smells like Sandal
The bamboo in its pride can never become one like the sandal.
कबीर लहरि समुद्र की, मोती बिखरै आये
बगुला परख ना जानिये, हंसा चुगि चुगि खाये।
कबीर कहते है की समुद्र के लहड़ के साथ मोती भी तट पर बिखर जाता है। बगुला को इसकी पहचान नही होती है पर हंस
उसे चुन-चुन कर खाता है। अज्ञानी गुरु के उपदेश का महत्व नही जानता पर ज्ञानी उसे ह्रदय से ग्रहण करता है।
Kabir lahari samudra ki,moti bikhrey aaye
Bagula parakh na janiye,hansa chugi chugi khaye.
Kabir says with the tide of sea, the pearl scatters all over the beach
The duck is unaware of he pearl but the swan eats picking it up.
गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान
गुरु बिन सब निस्फल गया, पुछौ वेद पुरान।
गुरु की शिक्षा के बिना माला फेरने और दान देने से कोई फल नहीं मिलने वाला है।
यह बात वेद पुराण आदि प्राचीन धर्म ग्रंथों में भी कही गयी है।
Guru bin mala ferte,guru bin dete dan
Guru bin sab nisfal gaya,puchhou ved puran.
If you repeat the rosary without a guru and donate without him
Everything becomes useless without guru,so says the ancient texts.
टेक करै सो बाबरा, टेकै होबै हानि
जो टेकै साहिब मिलै, सोई टेक परमानि।
जिद करना मूर्खता है। जिद करने से नुकसान होता है।
जिस जिद से परमात्मा की प्राप्ति हो वही जिद उत्तम है।
Tek karai so babra,tekai hobai hani
Jo tekai sahib milai,soi tek parman.
An obstinate is a fool,obstinacy causes loss
The obstinacy which grants God,that is a good obstinacy.
टेक ना किजीय बाबरे, टेक माहि है हानि
टेक छारि मानिक मिले, सतगुरु वचन प्रमानि।
मुर्खों कभी हठ मत करो। हठ से बहुत हानि होती है। हठ छोड़ने पर माणिक्य रत्न की प्राप्ति होती है।
यह सदगुरु के उपदेशों से प्रमाणित हो चुका है। जिद छोड़कर गुरु के उपदेशों को मानने पर ईश्वर रुपी रत्न की प्राप्ति होती है।
Tek na kijay babre,tek mahi hai hani
Tek chhari manik mile,satguru vachan pramani
An obstinate is an idiot,obstinacy causes loss
Leaving the obstinacy you get pearl,it is proved by the words of Guru
गुरु बिन अहनिश नाम ले, नहि संत का भाव
कहै कबीर ता दास का, परै ना पूरा दाव।
जो गुरु के निर्देश बिना दिन रात प्रभु का नाम लेता है और जिसके दिल में संत के प्रति प्रेम भाव नहीं है।
कबीर कहते है की उस व्यक्ति का मनोरथ कभी पूरा नही होता है।
Guru bin ahnish nam le,nahi sant ka bhaw
Kahai Kabir ta das ka,parai na pura daw.
One who repeats the name day and night without Guru and does not love the saints
Kabir says of that slave,his wish is never fulfilled completely.
मै तोहि सो कब कहयों, तु साकट के घर जाव
बहती नदिया डूब मरु, साकट संग ना खाव।
शाक्त मांसाहारी संप्रदाय के पुजारी होते है। कबीर कहते है की मैने तुम से शाक्त के घर के जाने के लिये कभी नहीं कहा।
तुम बहती नदियाॅं में डूब कर मर जाओ पर शाक्त के साथ कभी मत खाओ।
Mai tohi so kab kahyo,tu sakat ke ghar jaw
Bahti nadiya doob maru,sakat sang na khaw.
When have I told you to go to the house of a non vegetarian worshipper of God
You die by drowning in a flowing river but never eat with them.
निगुरा ब्राहमन नहि भला, गुरुमुख भला चमार
देवतन से कुत्ता भला, नित उठि भूके द्वार।
एक मूर्ख ब्राहमन अच्छा नही है एक गुरु का शिष्य चर्मकार अच्छा है।
देवताओं से कुत्ता अच्छा है जो नित्य उठकर दरवाजे पर भौंक कर चोरों से हमारी रक्षा करता है।
Nigura brahman nahi bhala,gurumukh bhala chamar
Devtan se kutta bhala,nit uthi bhuke dwar.
A foolish brahmin is not good, a cobbler who is a disciple of Guru is good
A dog is better than deity, daily on rising barks at the door.
पसुवा सो पालोउ परयो, रहु हिया ना खीज
उसर बीज ना उगसी, बोबै दूना बीज।
पशु समान प्रवृति बाले लोगों से पाला पड़ने पर लगातार खीज होती रहती है।
उसर परती जमीन पर दूगुना बीज डालने पर भी वह उगता नहीं है।
Pasuwa so palow paryo, rahu rahu hiya na kheej
Usar beej na ugsi,bobai doona beej.
One who is under the control of animal-like tendencies is vexed over and again
The seed does not grow in the fallow, even if you sow the seeds twice.
राजा की चोरी करै, रहै रंक की ओट
कहै कबीर क्यों उबरै, काल कठिन की चोट।
राजा के यहाॅं चोरी करके गरीब के घर शरण लेने पर कोई कैसे बच पायेगा।
कबीर का कहना है की बिना गुरु के शरण में गये कल्पित देवताओं के द्वारा तुम मृत्यु के देवता काल के मार से कैसे बच पाओगे।
Raja ki chori karai,rahai rank ki oat
Kahai Kabir kyon ubrai,kal kathin ki chot.
Steal the things of king but remains in the garb of the poor
Says Kabir how can such a person release himeself from the blow of death.
भौसागर की तरास से, गुरु की पकरो बांहि
गुरु बिन कौन उबारसि, भौजाल धरा माहि।
इस संसार सागर के भय से त्राण के लिये तुम्हें गुरु की बांह पकड़नी होगी।
तुम्हें गुरु के बिना इस संसार सागर के तेज धारा से बचने में और कोई सहायक नहीं हो सकता है।
Bhausagar ki tras se,Guru ki pakro banhi
Guru bin kaun ubarsi,bhaujal dhara mahi.
When you fear this wordly sea, catch the arm of the Guru
Only the Guru can deliver from the great currents of worldly water.
सब धरती कागज करुॅं, लेखन सब बनराय
साात समुंद्र की मसि करुॅं, गुरु गुन लिखा ना जाये।
संपूर्ण धरती को कागज, सारी दूनियाॅ के जंगलों को कलम और सातों समुद्र का जल यदि स्याही हो जाये
तब भी गुरु के गुणों का बर्णन नहीं किया जा सकता है।
Sab dharti kagad karun,lekhan sab banrai
Sat samudra ki masi karun,Guru gun likha na jaye.
If whole earth becomes paper and all the branches of the trees become pen
If all seven seas become the ink, even then the merits of Guru can never be written.
सब कुछ गुरु के पास है, पाइये अपने भाग
सेबक मन सौंपे रहे, निशी दिन चारणांे लाग।
गुरु के पास सब ज्ञान का भंडार है और हमें अपने हिस्से का उनसे प्राप्त हो सकता है यदि हम अपने मन का
समर्पण कर दे और हमेशा उनके चरणों की सेवा में रत रहें।
Sab kutchh Guru ke pas hai,paiye apne bhag
Sebak man saupe rahe,nishi din charno lag.
Guru has all the resources, you can get your share from him
If you surrender your mind and daily sit at his feet.
प्रेम प्याला लो पिये, सीस दक्षिना देये
लोभी सीस ना दे सके, नाम प्रेम का लेये।
जो प्रेम का प्याला पीना चाहता है वह गुरु दक्षिणा में सिर का वलिदान भी देना जानता है।
लोभी सिर नहीं दे सकता वह सिर्फ प्रेम का नाम भर लेता है।
Prem piyala lo piye,sis dakshina deye
Lovi sis na de sake,nam prem ka leye.
One who wishes to drink the cup of love,will have to give his head in reward
The lustful cannot give his head,he takes only the name of love.
हरि कृपा तब जानिये, दे मानव अवतार
गुरु कृपा तब जानिये, छुराबे संसार।
प्रभु की कृपा हम तब जानते है जब उन्हांेने हमें मनुष्य रुप में जन्म दिया है।
गुरु की कृपा तब जानते है जब वे हमें इस संसार के सभी बंधनों से मुक्ति दिलाते है।
Hari kripa tab janiye,de manav awatar
Guru kripa tab janiye,chhurabe sansar.
You know the grace of God as he has given you birth as a man
You know the grace of Guru when he grants liberation from the world.
हरि रुठै गति ऐक है, गुरु शरनागत जाये
गुरु रुठै ऐकोय नहि, हरि नहि करै सहाये।
प्रभु के रुठने से एक उपाय है की आप गुरु के शरण में चले जाये।
परन्तु गुरु के रुठने से एक भी उपाय नहीं है क्यांेकि तब प्रभु भी उसकी कोई सहायता नहीं करते है।
Hari ruthai gati ek hai,Guru sharnagat jaye
Guru ruthai ekoy nahi,Hari nahi karai sahay.
When God is displeased, you go to the shelter of Guru
When the Guru is displased, you don’t have any option,even the God does not come to help.
साकत संग ना जायीये, दे मांगा मोहि दान
प्रीत संगति ना मिलेय, छारै नहि अभिमान।
मूर्ख के साथ कभी मत जाइये चाहे वे आपको मुॅंहमांगा देने को तैयार हों।
प्रेम नहीं मिलेगा कारण वे अपना अभिमान कभी नहीं छोडं़ेगे।
Sakat sang na jayiye,de manga mohi dan
Preet sangati na milay,chharai nahi abhiman.
Never go along with idiots even if he gives you as per your wishes
You won’t get love,he won’t abandon pride.