कबीर के दोहे | Kabir ke Dohe (Anger/क्रोध)

जहां काम तहां नाम नहीं,जहां नाम नहि काम दोनो कबहू ना मिलैय रवि रजनी एक ठाम।
जहाॅं काम,वसाना,इच्छा हो वहाॅं प्रभु नहीं रहते और जहाॅं प्रभु रहते है वहाॅं काम,वासना,इच्छा नहीं रह सकते। इन दोनों का मिलन असंभव है जैसे सुर्य एंव रात्रि का मिलन नहीं हो सकता।
Jahan kaam tahan naam nahi, jahan naam nahi kaam Donoe kabahu na milay ravi rajni ek tham.
Where there is desire there is no God where is God there is no desire Both of them can never meet as sun and night can;t stay at one place.
यह जग कोठी काठ की, चहुं दिश लागी आाग भीतर रहै सो जलि मुअै, साधू उबरै भाग।
यह संसार काठ के महल की भाॅंति है जिसके चतुर्दिक आगलगी है। इसके अंदर का प्राणी जल मरता है पर साधु बचकर भाग जाता है। यहाॅं क्रोध आग का परिचायक है। साधु समस्त क्रोध-विकार से वंचित है।

Yeh jag kothi kath ki, chahu dish lagi aag Bhitar rahai so jali muay, sadhu ubare bhag.
World is a house of woods wherein there is fire in all four sides He will burn to death who is inside but a saint runs away is saved.

दसो दिशा से क्रोध की उठि अपरबल आग शीतल संगत साध की तहां उबरिये भाग।
सम्पूर्ण संसार क्रोध की अग्नि से चतुर्दिक जल रहा है। यह आग अत्यंत प्रवल है। लेकिन संत साधु की संगति शीतल होती है जहाॅं हम भाग कर बच सकते हैं।
Daso disha se krodh ki uthi aparbal aag Shital sangat sadh ki tahan ubariye bhag.
A great fire has arisen of anger from all ten sides The company of saint is very cool wherein you can save yourself from the fire.

क्रोध अगिन घर घर बढ़ी, जलै सकल संसार दीन लीन निज भक्त जो तिनके निकट उबार।
घर-घर क्रोध की अग्नि से सम्पूर्ण संसार जल रहा है परंतु ईश्वर का समर्पित भक्त इस क्रोध की आग से अपने को शीतल कर लेता है। वह सांसरिक तनावों एंव कष्ठों से मुक्त हो जाता है।

Krodh agani ghar ghar badhi,jalai sakal sansar Deen leen nij bhakt jo tinke nikat ubar.
The fire of anger is destroying every home wherein entire world is burning .One who is a devotee of God is saved.