गुरू नानक के दोहे | Guru Nanak ke Dohe(साधक/Seeker)

कागदि कलम न लिखणहारू।
मंने काबहि करनि वीचारू।
ऐसी कोई कागज और कलम नही बनी है अैार
कोई ऐसा लिखने बाला भी नहीं है जो
प्रभु के नाम की महत्ता का वर्णन कर सके।
ऐसानामु निरंजनु होइ।
जे को मंनि जाणै मनि कोइ।
प्रभु नाम के सुमिरण मनन करने का महत्व तो केवल वही आदमी जान समझ सकता है।
दूसरा कोई मनुश्य उसका वर्णन नही कर सकता है।
मंनै सुरति होवै मनि बुधि।
मंनै सगल भवण की सुधि।
नाम सुमिरण करने से हीं ईश्वर के प्रति प्रेम उत्पन्न होता है
तथा उसकी बुद्धि भी पवित्र हो जाती है।
तब उस ब्यक्ति को संसार के समस्त लोकों का ज्ञान प्राप्त हो जाता है।
मंनै मुहि चोटा ना खाइ।
मंनै जम कै साथि न जाइ।
प्रभु का चिंतन करने बाला काल मृत्यु के घात से भी सुरक्षित रहता है।
वह मौत के मुॅह में नही जाता है।वह मनस्वी अमरता प्राप्त करता है।
उसे मृत्यु दूत नही ले जा पाते हैं।
ऐसा नामु निरंजनु होइ।
जे को मंनि जाणै मनि कोइ।
प्रभु का नाम सब दोशों से रहित है-अतः उनके नाम के महात्म को केवल
सुमिरण करने बाला हीं जान पाता है-अन्य कोई दूसरा नहीं।
मंनै मारगि ठाक न पाइ।
मंनै पति सिउ परगटु जाइ।
प्रभु नाम के मनन चिंतन करने बाले के सामने
किसी तरह की विघ्न बाधा नहीं आती है।
वह ब्यक्ति सभी जगह मान इज्जत पाता है।
मंनै मगु न चलै पंथु।
मंनै धरम सेती सनबंधु।
जो ब्यक्ति प्रभु नाम की दीक्षा लेता है
वह दूसरे लोगों के द्वारा चलाये गये पंथों में भ्रमित नही होता।
वे कोई अन्य रास्ता नही अपनाते और सर्वदा सच्चे धर्म पर अडिग रहते हैं।
ऐसा नामु निरंजनु होइ।
जे को मंनि जाणै मनि कोइ।
इसी कारण गुरू नानक देव जी का दृढ़ विश्वास है
कि नाम की महिमा केवल उसे मनन सुमिरण करने
बाला हीं जानता है अन्य कोई नहीं जान सकता।
मंनै पावहि मोखु दुआरू।
मंनै परवारै साधारू।
प्रभु नाम का नित्य स्मरण करने बाला हीं मुक्ति मोक्ष का अधिकारी है।
वह अपने सम्पूर्ण परिवार को भी ईश्वर की शरण में लाकर ताड़ देता है।
मंनै तरै तारे गुरू सिख।
मंनै नानक भवहि न भिख।
प्रभु के नाम का निरंतर मनन करने बाला स्वयं तो संसार रूपी सागर को
पार कर हीं जाता है-वह अपने साथ सभी गुरू भाइयों को भी तार देता है।
नानक देव जी का विश्वास है कि वह 84 लाख योनियों में नही भटकता है।
उसमें तब किसी तरह की इच्छा भी नही रह जाती है।
ऐसा नाम निरंजनु होइ।
जे को मंनि जाणै मनि कोइ।
नाम का मनन करने बाला हीं उसका
महत्व जानता है-दूसरा कोई नहीं।