गुरू नानक के दोहे | Guru Nanak ke Dohe(प्रभु को नमन/Rememberance)

मति विचि रतन जवाहर माणिक
जे इक गुर की सिख सुणी।
यदि आदमी गुरू की शिक्षाओं को अपने जीवन में ब्यवहारतः
अपनाये तो उसे सारे रत्न जवाहर माणिक्य उसके हृदय के भीतर मिल सकते हैं
लेकिन ये समस्त धन तो उसके समक्ष गौण हैं जो प्रभु हृदय के अन्दर बैठा है।
गुरा इक देहि बुझाई।
सभना जीआ का इकु दाता
सो मैं विसरि न जाई।
उस महान गुरू की शिक्षा है कि समस्त
प्राणियों को देने बाला एक हीं परमात्मा है
जिसे हमें कदापि नहीं विस्मरण करना चाहिये।
जे जुग चारे आरजा
होर दसूणी होइ।
नवा खंडा विचि जाणीऐ
नालि चलै सभु कोइ।
चंगा नाउ रखाइ कै
जसु कीरति जगि लेइ।
हमारी आयु कितनी भी क्यों न हो जाये-वह चारों युगों के बराबर हो जाये और
उसकी प्रतिश्ठा संसार के सभी खंडों एवं भुवनों में भी क्यों न हो जाये
सब लोग उसके अनुयायी हो जायें उसे अच्छा मानने लगें सभी उसकी
प्रतिश्ठा गाने लगें-फिर भी वह परमात्मा के समक्ष तुच्छ है।
जे तिसु नदरि न आवई
त वात न पुछै के।
कीटा अंदरि कीटु
करि दोसी दोसु धरे।
यदि ब्यक्ति परमात्मा की नजर पर नही रहे तो
संसार में उसे किसी की मदद नही मिल सकती है।
तब वह कीड़ों मच्छड़ों से भी अधम माना जायेगा।
बुरे लोग भी उसे हीं बुरा मानेंगें।
नानक निरगुणि गुणु करे
गुणवंतिआ गुणु दे।
तेहा कोइ न सुझई
जि तिसु गुणु कोइ करे।
प्रभु अत्यंत शक्तिशाली है।
वह गुणहीन ब्यक्त् को अति सामथ्र्यवान गुणी बना देते हैं
और गुणी ब्यक्ति को अत्यधिक गुणवान बना देते हैं।
लेकिन संसार में ऐसा कोई आदमी नहीं जो परमेश्वर को अधिक गुणवान बना सकता है।
सुणिऐ सिध पीर सुरि नाथ
सुनिऐ ध्रति धवल आकास।
ईश्वर के नाम सुनने भजने एवं मनन करने के कारण हीं
सिद्ध लोग पीरजादे देवता एवं नाथों को उत्तम पद प्राप्त होता है।
इसी कारण दुनिया में धर्म और आकाश को स्थाई पद प्राप्त है।
सुणिऐ दीप लोअ पाताल।
सुणिऐ पोहि न सकै कालु।
सभी अनंत द्वीपों लोकों पातालों को प्रभु के कारण हीं स्थिरता प्राप्त है।
नाम सुनने और भजने बालों के पास मृत्यु भी नहीं पहुॅच पाता है।
प्रभु के नाम सुमिरण से अमरत्व प्राप्त होता है।
नानक भगता सदा विगासु
सुणिऐ दूख पाप का नासु।
प्रभु का नाम सुनने और सुमिरण करने बाले को नित्य स्थिर प्रसन्नता प्राप्त होती है।
नाम के सुमिरण से समस्त दुखों कश्टों पापों का नाश हो जाता है।
सुणिऐ ईसरू बरमा इंदु।
सुणिऐ मुखि सालाहण मंदु।
शंकर ब्रम्हा और इंद्र का असली पद प्रभु के नाम के कारण हीं टिका हुआ है।
सभी देवताओं के पद के जड़ में परमात्मा हीं हैं।
निम्न जाति के लोग भी प्रभु नाम के सुमिरण से पूज्य पद प्राप्त किये हैं।
प्रभु का नाम नीच अधम को उच्च एवं पूजनीय बना देता है।
सुणिऐ जोग जुगति तनि भेद।
सुणिऐ सासत सिम्रिति वेद।
नाम स्मरण से हीं इस देह और ईश्वर के एकात्मता का भेद ज्ञात होता है।
ज्ञान होता है कि यह मरणधर्मा शरीर किस प्रकार प्रभु से एकाकार है।
प्रभु के सुमिरण से हीं वेदों शाश्त्रों स्मृतियों एवों पुराणों का ज्ञान हो जाता है।
इन सभी धर्म शाश्त्रों का आधार ईश्वर का स्मरण हीं है।
नानक भगता सदा विगासु।
सुणिऐ दूख पाप का नासु।
गुरू नानक की वाणी है कि प्रभु नाम के स्मरण से
सभी दुखों पापों का अंत हो जाता है तथा
भक्त सर्वदा प्रसन्न चित्त रहता है।
सुणिऐ सतु संतोखु गिआनु।
सुणिऐ अठसठि का इसनानु।
प्रभु नाम के स्मरण से हीं सत्य संतोश एवं ज्ञान की प्राप्ति होती है।
प्रभु का नाम सुनना 68 तीर्थों में स्नान करने का फल देता है।
सुणिऐ पड़ि पड़ि पावहिं मानु।
सुणिऐ लागै सहजि धिआनु।
प्रभु के नाम का सुमिरण करने से पद प्रतिश्ठा प्राप्त होती है
एवं अपने में हीनता एवं लघुता का बोध खत्म हो जाता है।
तब आदमी सुगमतापूर्वक ध्यान की अवस्था प्राप्त कर लेता है।
नानक भगता सदा विगासु।
सुणिऐ दूख पाप का नासु।
नाम सुमिरण करने बाले हमेशा खुश रहते हैं।
उनके सभी दुखों तकलीफाे पापों का खात्मा हो जाता है।
सुणिऐ सरा गुणा के गाह।
सुणिऐ सेख पीर पातिसाह।
नाम सुमिरण से गुणों का सागर मथने का लाभ मिलता है।
नाम सुमिरण के कारण हीं पीर पैगम्बर और राजाओं को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
सुणिऐ अंधे पावहि राहु।
सुणिऐ हाथ होवै असगाहु।
नाम सुमिरण करके अंधे भी रास्ते पा जाते हैं।
प्रभु के कारण हीं अथाह की थाह ज्ञात हो जाती है।
कठिन दुर्गम असंभव काम भी प्रभु के नाम सुमिरण से आसान हो जाता है।

नानक भगता सदा विगासु।
सुणिऐ दूख पाप का नासु।
इसी कारण गुरू नानक का कथन है कि
नाम स्मरण करने से स्थिर प्रसन्नता और सुख मिलता है।
इससे सभी दुखों एवं पापों का अन्त हो जाता है।
मंने की गति कही न जाइ।
जे को कहै पिछै पछुताइ।
प्रभु नाम स्मरण मनन एवं चिंतन करने बाले लोगों की
मनःस्थिति का वर्णन नहीं किया जा सकता है।
यदि कोइ्र्र प्रभु के मनन के लाभों का वर्णन करना
चाहे तो उसमें अनेक गलतियाॅ रह जाने की गुंजाईस है।
इस कारण उसे बाद में पछतावा हो सकता है।