गुरू नानक के दोहे | Guru Nanak ke Dohe(निदिध्यासन/Nididhyāsana)

साचा साहिबु साचु नाइ भाखिआ भाउ अपारू। आखहि मंगहि देहि देहि दाति करे दातारू। प्रभु सत्य एवं उसका नाम सत्य है। अलग अलग विचारों एवं भावों तथा बोलियों में उसे भिन्न भिन्न नाम दिये गये हैं। प्रत्येक जीव उसके दया की भीख माॅगता है तथा सब जीव उसके कृपा का अधिकारी है और वह भी […]

गुरू नानक के दोहे | Guru Nanak ke Dohe(मनन/Contemplation)

गावै को जापै दिसै दूरि गावै को वेखै हादरा हदूरि। परमात्मा अनन्त पहुॅच की सीमा से परे एवं अदृश्य है-यह समझकर लोग उसे भजते हैं। किंतु कुछ लोग उसे सर्वत्र सभी दिशाओं में कण कण में ब्याप्त जानकर उसकी प्रशंसा में गीत गाते हैं। कथना कथी न आवै तोटि कथि कथि कथी कोटी कोटि कोटि। […]

गुरू नानक के दोहे | Guru Nanak ke Dohe(मंगलाचरण/Invocation)

सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरू अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि। यह मूल मंत्र है।प्रभु सत्य है।सत्य का अर्थ है चिरंतन स्थिति। जो सभी कालों मे बर्तमान है।वह अपने आप में पूर्ण है। उसके जैसा कोई नही है।उसने संसार की रचना की है। वह निर्भय है।वह बैर भाव से रहित है।वह काल से परे है। […]

गुरू नानक के दोहे | Guru Nanak ke Dohe(श्रवण /Hearing )

हुकमैं अंदरि सभु को बाहरि हुकम न कोइ। नानक हुकमै जे बुझै त हउमै कहै न कोइ। संसार का प्रत्येक प्राणी उसकी आज्ञा में बंधा है। जो मनुश्य उसके आदेश का अर्थ समझ जाता है वह सांसारिक अहंकार से बच जाता है। तब वह सभी बातों को प्रभु का आदेश मानकर खुशी से पालन करता […]